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संत जगदीश मुनि द्वारा गांव बनवाला हनवंता में विशेष न्यूरो व रेकी पद्धति शिविर जारी

फाजिलका-(दलीप दत्त)-योग एक ऐसा नायाब खजाना है कि जो इसे अपना लेता है तो वो फिर अमूल्य खजाना हासिल कर लेता है। उक्त उद्गार निरोग जीवन संस्थान के संचालक आचार्य संत जगदीश मुनि जी ने गांव बनवाला हनवंता में निरोग जीवन संस्थान के मुख्य आश्रम में जारी न्यूरो व रेकी पद्धति शिविर के दौरान प्रात:कालीन योग सत्र में व्यक्त किए। संत जी ने कहा कि आज पूरा विश्व योग की तरफ आकॢषत हो रहा है लेकिन भारतीय इसका महत्व नहीं जान पा रहे हैं।

संत जगदीश मुनि जी ने कहा कि आज मनुष्य लगातार तनाव तथा बीमारियों से ग्रस्त हो रहा है और दवाइयों का सहारा लेकर खुद को ओर बीमार बना रहा है। उन्होंने कहा कि सिर्फ प्रात: आधा घंटा योग क्रियाएं व व्यायाम करते हुए कई रोगों तथा तनाव से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि शुरूआती समय में प्रतिदिन योग को अपनाना मुश्किल अवश्य है लेकिन जब शरीर को आदत हो जाती है तो असीम आनंद की प्राप्ति होती है।

इस दौरान संत जगदीश मुनि जी ने योग के जरिए पीठ, सरवाइकल तथा जोड़ों के दर्द की समस्या से छुटकारा पाने की योग क्रियाएं करवाते हुए कहा कि योग एक आनंद का नाम है जिसे अपना कर मनुष्य पूरी तरह से आनंदित हो जाता है। हमारे ऋषि मुनियों ने योग क्रियाओं के जरिए खुद को बीमारियों से बचाते हुए सुखमय व खुशहाल दीर्घायु जीवन व्यतीत किया। संत जी ने कहा कि अगर देश को रोग मुक्त करना है तो न्यूरो व रेकी पद्धति को प्रफुल्लित करना होगा और साथ ही लोगों को योग के साथ जोडऩा होगा। योग के जरिए रोगों से बचा जा सकता है और न्यूरो व रेकी वो पद्धति है जो किसी रोग होने की सूरत में उसको जड़ से खत्म करती है। उन्होंने कहा कि दवाइयां एक बार अवश्य आराम प्रदान करती है जिससे हमें लगता है कि हमारा शरीर रोग मुक्त हो गया है लेकिन दवाइयां आज तक न तो किसी रोग को पूर्णत: ठीक कर पाई हैं और न ही कभी कर सकती हैं। दवाइयां रोग को दबाने का काम करती है। उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान को विश्व शक्ति बनाने के लिये देश वासियों को योग व न्यूरो रेकी पद्धति की तरफ वापस मुडऩा होगा।

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